बाराबंकी। प्रदेश सरकार द्वारा अनुदेशक एवं शिक्षामित्रों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा प्रदान किए जाने से इन वर्गों में खुशी की लहर है, लेकिन चिकित्सीय अवकाश की सुविधा न मिलने से उनमें गहरी पीड़ा और असंतोष भी व्याप्त है।
उच्च प्राथमिक अनुदेशक शिक्षक वेलफेयर एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष दिवाकर अवस्थी “गांधी” ने इस विषय पर सरकार का ध्यान आकृष्ट कराते हुए कहा कि जब अनुदेशक एवं शिक्षामित्रों को शिक्षकों की भांति कैशलेस चिकित्सा सुविधा दी गई है, तो उसी तर्ज पर उन्हें चिकित्सीय अवकाश का अधिकार भी दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि बीमारी की स्थिति में चिकित्सीय अवकाश न मिलने से कर्मचारियों को मानसिक एवं आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है, जो न्यायसंगत नहीं है। इलाज की सुविधा के साथ-साथ स्वस्थ होने के लिए अवकाश भी उतना ही आवश्यक है।
इस संबंध में संगठन की ओर से जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन प्रेषित किया गया, जिसमें संवेदनशील एवं सकारात्मक निर्णय लेने की मांग की गई है, ताकि अनुदेशक एवं शिक्षामित्रों को पूर्ण रूप से सम्मानजनक और मानवीय सुविधाएं मिल सकें।
ज्ञापन देने वालों में सुजीत सिंह (जिला महामंत्री), अम्बरीष यादव (जिला संगठन मंत्री), आशीष मिश्रा (जिला संयोजक), विशाल वर्मा, मनीष शुक्ला, नीरज पांडेय (प्रदेश प्रवक्ता), राम जी बाजपेई, सीता सिंह, आराधना जिला महिला उपाध्यक्ष एवं विनीता शामिल रहे।