बाराबंकी। कोतवाली नगर क्षेत्र के नगर पंचायत बंकी स्थित उत्तर टोला में 25 साल पुराने लूट के बाद दंपती की हत्या के सनसनीखेज मामले में अदालत ने फैसला सुनाया है। अपर जिला जज असद अहमद हाशमी ने साक्ष्यों के अभाव में दो आरोपितों को संदेह का लाभ देते हुए लूट, हत्या और गैंगस्टर एक्ट के आरोपों से बरी कर दिया। तीसरे आरोपित को दो माह पूर्व भगोड़ा घोषित कर मुकदमे से अलग कर दिया गया था।
यह वारदात 14 मार्च 2001 की रात की है। अत्यंत व्यस्त इलाके में रहने वाले गुलाम उस्मानी और उनकी पत्नी मीना के क्षत-विक्षत शव 15 मार्च की सुबह उनके घर में मिले थे। दोनों के शरीर पर धारदार हथियार के सात-सात घाव पाए गए थे। इस मामले में रिश्तेदार व पड़ोसी गुलाम जहांगीर अशरफ की तहरीर पर मुकदमा दर्ज किया गया था। तहरीर में बताया गया कि रात करीब साढ़े दस बजे दो लोग घर आए थे और खुद को ‘गुड्डू’ बताया था, जिसके बाद दरवाजा खोला गया।
शुरुआत में पुलिस ने पहचान न होने का हवाला देते हुए अंतिम रिपोर्ट दाखिल की थी। करीब दो साल बाद पुनः विवेचना में मित्तई देवा के मूल निवासी चांदबाबू, मोहम्मदपुर खाला थाना क्षेत्र के हासिम उर्फ गुड्डू और कृष्णानगर निवासी नजमुद्दीन को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया। जमानत के बाद चांदबाबू फरार हो गया, जिसे 13 जनवरी 2026 को भगोड़ा घोषित किया गया।
करीब 23 साल चले मुकदमे में अभियोजन पक्ष महज एक गवाह तत्कालीन इंस्पेक्टर कोतवाली एपी गंगवार का बयान दर्ज करा सका। एफएसएल जांच, पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टर का बयान और गैंगस्टर का अप्रूव्ड गैंग चार्ट पेश नहीं हो सका। इन्हीं कमियों के चलते अदालत ने दो आरोपितों को बरी कर दिया।