बाराबंकी। पुराने सिक्के बेचने के नाम पर साइबर ठगों ने कोतवाली नगर क्षेत्र के ओबरी मोहन नगर निवासी शैलेंद्र कुमार तिवारी को जाल में फंसा लिया। आरोप है कि ठगों ने न केवल शैलेंद्र से नकदी ऐंठी, बल्कि उनके नाम पर विभिन्न बैंकों में 11 खाते खुलवाकर एटीएम और पासबुक महाराष्ट्र के पते पर मंगवा लिए, जिनका बाद में साइबर फ्रॉड में इस्तेमाल हुआ।
फेसबुक से शुरू हुआ ठगी का जाल: शैलेंद्र ने बताया कि अप्रैल 2024 में फेसबुक पर पुराने सिक्कों की ऊंची कीमत मिलने की जानकारी देख संपर्क किया। स्वयं को राकेश बताने वाले व्यक्ति ने कहा कि मुंबई के बांद्रा ईस्ट स्थित कार्यालय में ऐसे सिक्के खरीदे जाते हैं। उसने सिक्कों की कीमत ₹82 लाख 40 हजार 900 बताई और “रजिस्ट्रेशन” व “पेपर वर्क” के नाम पर क्रमशः ₹1,250 व ₹18,650 ऑनलाइन जमा कराए।
ट्रांसफर मैनेजर बन ठगों ने खुलवाए खाते: बाद में “अजय सिंह” नामक व्यक्ति ने खुद को ट्रांसफर मैनेजर बताते हुए कहा कि राशि अधिक है, इसलिए 7–8 बैंक खाते खुलवाकर उनकी पासबुक व एटीएम वेरिफाई करवाएं।
पीड़ित ने बैंक ऑफ इंडिया, एचडीएफसी, इंडियन बैंक, फेडरल बैंक, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, बैंक ऑफ बड़ौदा, यूनियन बैंक, भारतीय स्टेट बैंक, पंजाब नेशनल बैंक और एनएसडीएल बैंक में खाते खुलवाकर दस्तावेज अजय के बताए पते लिलुआ, पश्चिम बंगाल भेज दिए।
बैंक से खुली पोल, धमकी मिलने पर हुआ सच का अहसास: फेडरल बैंक से सूचना मिली कि खातों में बड़ी मात्रा में धनराशि का लेनदेन हो रहा है। जब शैलेंद्र ने पूछताछ की, तो ठगों ने उसे स्टांप पेपर का हवाला देते हुए जेल भेजने की धमकी दी। तब जाकर उसे अपने साथ हुई धोखाधड़ी का अहसास हुआ।
अदालत के आदेश पर दर्ज हुआ मुकदमा: पुलिस को शिकायत देने के बावजूद कोई कार्रवाई न होने पर पीड़ित ने अदालत की शरण ली। न्यायालय के आदेश पर साइबर थाना बाराबंकी में मुकदमा दर्ज किया गया है।