-
अयोध्या और काशी के विद्वान आचार्यों के सानिध्य में गूँजे वैदिक मंत्र
-
यज्ञोपवीत के बिना संध्यावंदन और गायत्री जप का अधिकार नहीं: आचार्य कन्हैयालाल मिश्र
बाराबंकी। भारतीय संस्कृति के आधार स्तंभ वेदों के अध्ययन का अधिकार प्रदान करने वाले ‘उपनयन संस्कार’ (यज्ञोपवीत) का भव्य आयोजन आज हरख ब्लॉक के अमर बलिदानियों की जन्मभूमि, दियानत नगर के ऐतिहासिक मेला मैदान में संपन्न हुआ। सप्तर्षि संस्थानम् ट्रस्ट के तत्वावधान में आयोजित इस द्विदिवसीय सामूहिक यज्ञोपवीत एवं विद्वत सम्मेलन में चैत्र मास और मीन संक्रांति के शुभ संयोग पर प्रयागराज, काशी और अयोध्या के प्रकांड विद्वानों द्वारा 16 बटुकों को वैदिक मंत्रोच्चार के बीच जनेऊ धारण कराया गया।
कार्यक्रम के प्रथम दिन यजमान आचार्य कन्हैयालाल मिश्र (सपत्नीक) एवं संयोजक आचार्य रविकांत मिश्र व आचार्य सीताकान्त स्वयंभू के सानिध्य में प्रायश्चित कर्म और पंचांग पूजन संपन्न हुआ। संध्या काल में अयोध्या और वृंदावन से आए कलाकारों द्वारा भजन संध्या एवं प्रवचन का आयोजन किया गया।
द्वितीय दिवस की शुरुआत बटुकों के मुंडन संस्कार से हुई। तत्पश्चात भगवान गणेश, गायत्री, सावित्री और सरस्वती आदि वेदियों पर देवताओं का आवाहन कर पूजन किया गया। आचार्य रविकांत मिश्र ने सभी बटुकों को कान में गायत्री मंत्र की दीक्षा दी।
मुख्य अतिथि महंत ओम प्रकाश दास जी महाराज (तपस्वी छावनी, अयोध्या) ने कहा, यह क्षेत्र भगवान श्रीराम की शिक्षा-दीक्षा की पावन भूमि है। यहाँ सामूहिक यज्ञोपवीत का आयोजन एक ऐतिहासिक पहल है।





