Saturday, June 6, 2026
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देशी गायों के पालन को मिलेगा बढ़ावा, दुग्ध उत्पादन में आत्मनिर्भर बनेगा बाराबंकी

  • गीर,साहीवाल, थारपारकर गायों पर मिलेगा 50 प्रतिशत अनुदान

  • गाय पालन के लिए 30 नवंबर करना होगा आवेदन

वीरेन्द्र यादव

बाराबंकी। देशी नस्ल की गायों के संवर्धन और दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने बाराबंकी समेत 57 जिलों में दो बड़ी योजनाओं की शुरुआत की है। मुख्यमंत्री स्वदेशी गो संवर्धन योजना और नंद बाबा दुग्ध मिशन के तहत गीर, साहीवाल और थारपारकर जैसी उच्च दुग्ध उत्पादक नस्लों की गायों पर 40 से 50 प्रतिशत तक अनुदान दिया जा रहा है। इन योजनाओं का उद्देश्य न केवल स्वदेशी नस्लों को बचाना है, बल्कि ग्रामीण पशुपालकों को स्वरोजगार से जोड़ते हुए दुग्ध क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देना भी है।

मुख्यमंत्री स्वदेशी गो संवर्धन योजना के अंतर्गत दो गायों की एक यूनिट पर कुल दो लाख रुपये की लागत में से चालीस प्रतिशत यानी अस्सी हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी जा रही है। बाराबंकी जनपद में इस योजना के तहत अब तक 105 आवेदन प्राप्त हो चुके हैं, जिनकी जांच प्रक्रिया जारी है। जिले में कुल 24 यूनिट स्थापित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जिनमें 12 पुरुष और 12 महिला पशुपालकों को चयनित किया जाएगा।

30 नवंबर आवेदन करने की अंतिम तिथि: दूसरी ओर नंद बाबा दुग्ध मिशन के तहत संचालित नंदिनी कृषक समृद्धि योजना में देशी नस्ल की 10 गायों की एक यूनिट पर कुल 23 लाख 60 हजार रुपये की लागत निर्धारित की गई है, जिस पर सरकार द्वारा 50 प्रतिशत यानी 11 लाख 80 हजार रुपये की सहायता दो किस्तों में प्रदान की जाएगी। इस योजना के लिए आवेदन की अंतिम तिथि 30 नवंबर निर्धारित की गई है। जिले में चार यूनिट की स्थापना का लक्ष्य रखा गया है।

विशेषज्ञों के अनुसार गीर गाय प्रतिदिन 14 से 16 लीटर दूध देती है, जिसकी बाजार में औसत कीमत 65 रुपये प्रति लीटर है। इसी तरह साहीवाल गाय 10 माह तक दूध देती है और एक ब्यात में 2500 लीटर से अधिक उत्पादन कर सकती है। थारपारकर नस्ल की गायें भी 300 दिन तक 12 से 14 लीटर प्रतिदिन दूध देने में सक्षम हैं। तीनों नस्लें रोग प्रतिरोधक क्षमता में भी बेहतर मानी जाती हैं और एक गाय की कीमत एक लाख रुपये तक होती है।

देशी गायों की उपयोगिता को देखते हुए सरकार इन योजनाओं के माध्यम से पशुपालकों को आर्थिक सहायता प्रदान कर रही है। योजनाओं को लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में उत्साह देखने को मिल रहा है और आने वाले समय में यह पहल बाराबंकी को देशी दुग्ध उत्पादन का बड़ा केंद्र बना सकती है।
डॉ. अतुल अवस्थी, मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी, बाराबंकी

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