जिला लेखपाल संघ के आह्वान पर लेखपालों ने सर्वसम्मति से लिया फैसला
बाराबंकी। रामसनेहीघाट तहसील में अतिरिक्त सर्किलों का बढ़ता कार्यभार लेखपालों के लिए परेशानी का सबब बन गया है। इससे नाराज लेखपालों ने सख्त रुख अपनाते हुए अतिरिक्त सर्किलों का बस्ता बांधकर कार्य करने से इनकार कर दिया। बुधवार को सभी लेखपालों ने सामूहिक रूप से बस्ता जमा कर अपना विरोध दर्ज कराया। यह निर्णय जिला लेखपाल संघ के आह्वान पर सर्वसम्मति से लिया गया।
संघ पदाधिकारियों के अनुसार, रामसनेहीघाट तहसील में कुल 77 सर्किल स्वीकृत हैं, जबकि मात्र 52 लेखपाल ही कार्यरत हैं। शेष लगभग 25 सर्किलों का अतिरिक्त भार मौजूदा लेखपालों पर डाल दिया गया है। स्थिति यह है कि एक-एक लेखपाल के पास दो से तीन अतिरिक्त सर्किलों की जिम्मेदारी है, जिससे मूल कार्य बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं।
लेखपालों का कहना है कि इस व्यवस्था का सीधा असर खतौनी, नामांतरण सहित अन्य राजस्व सेवाओं पर पड़ रहा है। समय पर काम न हो पाने से आम जनता को भी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। संघ अध्यक्ष अश्वनी कुमार मिश्रा ने स्पष्ट किया कि कई लेखपाल अन्य विभागों में संबद्ध हैं, जिसके चलते उनके मूल सर्किल रिक्त पड़े हैं। ऐसे में नियमित चार्ज दिए बिना अतिरिक्त कार्य कराना न तो व्यावहारिक है और न ही प्रशासनिक रूप से उचित।
बैठक में यह भी सामने आया कि कुछ लेखपालों के पास तीन से चार सर्किलों तक का अतिरिक्त कार्यभार है। इससे न केवल कार्य की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है, बल्कि जवाबदेही भी स्पष्ट नहीं रह पा रही है। लेखपालों ने मांग की कि रिक्त पदों पर शीघ्र नियुक्ति की जाए और जहां अतिरिक्त कार्य लिया जा रहा है, वहां विधिवत चार्ज प्रदान किया जाए।
लेखपालों ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र समाधान नहीं निकाला गया तो राजस्व कार्य पूरी तरह प्रभावित हो सकते हैं और उन्हें आंदोलन का रास्ता अपनाने के लिए बाध्य होना पड़ेगा। बैठक में संघ अध्यक्ष अश्वनी मिश्रा, अम्बुज मिश्रा, धनंजय पांडे, पवन मौर्य, अजय दीप सिंह, सेतुबन्धु पांडेय सहित कई लेखपाल उपस्थित रहे।