Monday, October 19, 2026
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धर्ममय रथ के जरिए विद्यार्थियों को दिया नैतिकता और सदाचार का संदेश

  • कम्पोजिट विद्यालय सिरौलीगौसपुर में शारदीय नवरात्रि एवं विजयादशमी पर श्रीराम के आदर्शों से कराया परिचित

बाराबंकी। कम्पोजिट विद्यालय सिरौलीगौसपुर में शारदीय नवरात्रि एवं विजयादशमी उत्सव के अवसर पर भगवान श्रीराम के आदर्शों, धर्म, सत्य, सदाचार और नैतिक मूल्यों पर आधारित प्रेरणादायी संदेश दिया गया। रामचरितमानस की चौपाई “सखा धर्ममय अस रथ जाकें। जीतन कहँ न कतहुँ रिपु ताकें॥” के माध्यम से विद्यार्थियों को जीवन में सफलता के लिए सद्गुण अपनाने की प्रेरणा दी गई।

कार्यक्रम में भगवान श्रीराम और रावण के युद्ध प्रसंग का उल्लेख करते हुए बताया गया कि जब विभीषण ने श्रीराम को बिना रथ और कवच के रावण से युद्ध करते देखा, तो वे चिंतित हो गए। इस पर प्रभु श्रीराम ने उन्हें धर्ममय रथ का महत्व समझाया।

श्रीराम के अनुसार, शौर्य और धैर्य रथ के पहिए, सत्य और शील ध्वजा-पताका तथा बल, विवेक, इंद्रिय-निग्रह और परोपकार घोड़े हैं। क्षमा, दया और समता की डोर इन घोड़ों को बांधे रखती है। ईश्वर का भजन सारथी, वैराग्य ढाल, संतोष तलवार, दान फरसा, बुद्धि शक्ति और श्रेष्ठ विज्ञान धनुष के समान है। निर्मल एवं स्थिर मन तरकस तथा शम, यम और नियम बाण हैं, जबकि गुरुजनों का सम्मान अभेद्य कवच है।

इस प्रसंग के माध्यम से विद्यार्थियों को बताया गया कि वास्तविक विजय केवल बाहरी शक्ति और संसाधनों से नहीं, बल्कि सत्य, साहस, धैर्य, अनुशासन, परोपकार और आत्मसंयम जैसे गुणों से प्राप्त होती है। विजयादशमी का पर्व भी बुराई पर अच्छाई, असत्य पर सत्य और अधर्म पर धर्म की विजय का संदेश देता है।

विद्यालय में विद्यार्थियों के चरित्र निर्माण और नैतिक मूल्यों के विकास के लिए ऐसे सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक प्रसंगों को उपयोगी बताया गया। इस अवसर पर शिक्षक बृजेश कुमार शुक्ला, मोहम्मद हलीम, रुद्र प्रताप पाण्डेय, सुनील कुमार यादव, अमित कुमार मिश्रा, इंद्रेश कुमार यादव सहित अन्य शिक्षक उपस्थित रहे।

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