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जहांगीराबाद थाना क्षेत्र के फतेहसराय गांव की घटना, लाखों का नुकसान
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घर वालों का रो-रो कर बुरा हाल, आग बुझाने में ग्रामीणों का प्रयास नाकाफी, दमकल टीम ने पाया काबू
बाराबंकी। जहांगीराबाद थाना क्षेत्र के फतेहसराय गांव में रविवार की देर रात एक भीषण और दर्दनाक हादसा हो गया। गांव के बाहर रेलवे लाइन के किनारे खेत में बने छप्परनुमा बंगले में संदिग्ध परिस्थितियों में आग लग गई। आग इतनी विकराल थी कि कुछ ही मिनटों में पूरा छप्पर लपटों में घिर गया। इस हादसे में सात गाय, तीन बछड़े और लगभग 40 बकरियां जिंदा जलकर मर गईं। पशुओं को बचाने के प्रयास में पशु मालिक फूलचंद्र चौहान (55) भी गंभीर रूप से झुलस गए, जिन्हें उपचार के लिए निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

जानकारी के अनुसार ग्राम फतेहसराय निवासी फूलचंद्र चौहान वर्षों से गाय और बकरियां पालकर दूध बेचने का कार्य करते थे, जिससे उनके परिवार की आजीविका चलती थी। रविवार रात भी वे रोज की तरह अपने पशुओं को चारा-पानी देकर खूंटे से बांधने के बाद छप्पर के नीचे सो गए थे। उनकी पत्नी शकुंतला पास ही बने दूसरे छप्पर के नीचे सो रही थीं। रात करीब 11:30 बजे अचानक छप्पर में आग लग गई। आग की लपटें उठती देख फूलचंद्र ने शोर मचाया और बिना अपनी जान की परवाह किए बंधे पशुओं को खोलने लगे। इसी दौरान वे आग की चपेट में आ गए और गंभीर रूप से झुलस गए।
शोर सुनकर आसपास के ग्रामीण मौके पर दौड़े और अग्निशमन विभाग को सूचना दी। हालांकि आग इतनी तेजी से फैल चुकी थी कि ग्रामीण पशुओं को बचाने में असफल रहे। करीब एक घंटे बाद मौके पर पहुंचे दमकल कर्मियों ने कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया, लेकिन तब तक अधिकांश मवेशी जलकर मर चुके थे। घटना की सूचना पर सदर तहसीलदार मौके पर पहुंचे और हल्का लेखपाल को नुकसान का आकलन करने के निर्देश दिए। साथ ही पशु चिकित्सा विभाग को मृत एवं घायल पशुओं के संबंध में आवश्यक कार्रवाई करने को कहा गया।
सोमवार सुबह जिला पशु चिकित्सा अधिकारी की टीम ने मौके पर पहुंचकर मृत पशुओं का पोस्टमार्टम कराया और उन्हें दफन कराया। वहीं घायल फूलचंद्र का शहाबपुर स्थित निजी चिकित्सक के यहां इलाज जारी है, जहां उनकी हालत गंभीर बताई जा रही है। थाना प्रभारी दुर्गा प्रसाद शुक्ला ने बताया कि फिलहाल पीड़ित पक्ष की ओर से कोई तहरीर नहीं दी गई है और आग लगने के कारणों की जांच की जा रही है।
इस दर्दनाक हादसे से पूरे गांव में शोक की लहर है। मवेशियों की मौत और परिवार के एकमात्र कमाऊ सदस्य के घायल होने से पीड़ित परिवार के सामने गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। ग्रामीणों ने प्रशासन से पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता देने की मांग की है।




