लखनऊ। श्री सनातन ज्योतिष पद्धति के अनुसार वर्ष 2026 में मकर संक्रांति का पर्व 15 जनवरी, गुरुवार को श्रद्धा व विधि-विधान से मनाया जाएगा। ज्योतिषीय गणना के अनुसार सूर्य 14 जनवरी को दोपहर 12 बजकर 50 मिनट 23 सेकंड पर धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करेगा, लेकिन उदयातिथि के कारण संक्रांति का पुण्यकाल 15 जनवरी को सूर्योदय से प्राप्त होगा।
आचार्य दिनेश ज्योतिष वाचस्पति ने बताया कि मकर संक्रांति को उत्तरायण पर्व भी कहा जाता है। इस दिन सूर्य दक्षिणायन से उत्तरायण होता है, जिसे शुभ-अशुभ का संधिकाल माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह पर्व अंधकार से प्रकाश की ओर अग्रसर होने का प्रतीक है। उत्तरायण काल का विशेष महत्व है, इसी काल में भीष्म पितामह ने देह त्याग किया था।
पर्व के दिन प्रातः स्नान, ध्यान एवं दान का विशेष महत्व है। श्रद्धालु तिल, गुड़, खिचड़ी, वस्त्र, कंबल, फल एवं अन्न का दान करते हैं। वहीं 13 जनवरी को पंजाब सहित उत्तर भारत में लोहड़ी पर्व मनाया जाएगा, जो ऋतु परिवर्तन, कृषि और लोक परंपरा से जुड़ा हुआ है। लोहड़ी की अग्नि में खील, रेवड़ी व मूंगफली अर्पित कर सुख-समृद्धि की कामना की जाती है।