प्रशिक्षण केंद्र के साथ दो विद्यालयों का भी किया स्थलीय निरीक्षण, गतिविधि आधारित शिक्षण पर जोर
बाराबंकी। निपुण भारत मिशन के अंतर्गत विकास खंड फतेहपुर में आयोजित पांच दिवसीय एफएलएन प्रशिक्षण के तीसरे दिन मंगलवार को राज्य परियोजना कार्यालय, लखनऊ की टीम ने प्रशिक्षण केंद्र का स्थलीय निरीक्षण किया। टीम ने प्रशिक्षण की गुणवत्ता, व्यवस्थाओं, शिक्षकों की सक्रिय सहभागिता और गतिविधि आधारित शिक्षण पद्धति का जायजा लिया। राज्य परियोजना कार्यालय से पहुंचे अंकित गोयल ने प्रशिक्षण केंद्र के साथ प्राथमिक विद्यालय बिशुनपुर प्रथम व द्वितीय का भी निरीक्षण किया।
प्रशिक्षण गतिविधियों का लिया जायजा
सेठ आनंद राम जयपुरिया फतेहपुर में चल रहे प्रशिक्षण के दौरान श्री गोयल ने विभिन्न कक्षों में पहुंचकर शिक्षकों द्वारा की जा रही गतिविधियों का अवलोकन किया। उन्होंने प्रशिक्षण की विषयवस्तु और उसके व्यावहारिक उपयोग की जानकारी ली। बुनियादी साक्षरता एवं संख्याज्ञान को मजबूत करने के लिए बाल केंद्रित और रुचिकर शिक्षण विधियों को अपनाने पर जोर दिया गया।
प्रशिक्षण में शिक्षकों को बच्चों में पढ़ने, समझने, लिखने और बोलने की क्षमताओं के विकास के साथ प्रारंभिक गणितीय अवधारणाओं को मजबूत करने के लिए गतिविधियों और शिक्षण सामग्री के प्रयोग की जानकारी दी जा रही है। बच्चों के अधिगम स्तर और सीखने की गति के अनुसार शिक्षण रणनीति अपनाने पर भी विशेष जोर है।
शिक्षकों से किया संवाद
राज्य परियोजना की टीम ने प्रशिक्षणार्थी शिक्षकों से संवाद कर प्रशिक्षण की उपयोगिता, विषयवस्तु और गतिविधियों के संबंध में जानकारी ली। टीम ने शिक्षकों की सक्रिय सहभागिता का जायजा लेते हुए प्रशिक्षण में सीखी तकनीकों को विद्यालयों की नियमित शिक्षण प्रक्रिया में शामिल करने के लिए प्रेरित किया।
दो विद्यालयों का किया निरीक्षण
श्री गोयल ने प्राथमिक विद्यालय बिशुनपुर प्रथम व द्वितीय का भी निरीक्षण किया। विद्यालयों में शिक्षण व्यवस्था, बच्चों की शैक्षिक गतिविधियों और एफएलएन से संबंधित कार्यों की जानकारी ली गई। उन्होंने शिक्षकों को बच्चों की बुनियादी दक्षताओं को मजबूत करने के लिए सरल, स्थानीय और कम लागत वाली शिक्षण सामग्री के अधिकाधिक प्रयोग के लिए प्रेरित किया।
एआरपी दे रहे प्रशिक्षण
पांच दिवसीय प्रशिक्षण में एआरपी सुशील कुमार, अशोक कुमार, सुरेश चंद्र और राहुल यादव द्वारा शिक्षकों को विभिन्न विषयों पर प्रशिक्षण दिया जा रहा है। शिक्षकों को गतिविधियों के माध्यम से बच्चों को सीखने के अवसर उपलब्ध कराने, उनके अधिगम स्तर की पहचान करने और आवश्यकता के अनुसार शिक्षण रणनीति अपनाने की व्यावहारिक जानकारी दी जा रही है।
इस अवसर पर एसआरजी अवधेश पांडेय, एआरपी कुंवर सिद्धार्थ सहित विकास खंड के सभी एआरपी मौजूद रहे। प्रशिक्षण में बच्चों को पाठ्यपुस्तक आधारित शिक्षण तक सीमित न रखते हुए खेल, गतिविधि, संवाद और स्थानीय सामग्री के माध्यम से सीखने के अवसर देने पर जोर दिया गया। राज्य परियोजना टीम ने कहा कि प्रशिक्षण की सफलता तभी मानी जाएगी, जब यहां सीखी गई तकनीकों का विद्यालयों में प्रभावी क्रियान्वयन हो और बच्चों के अधिगम स्तर में सुधार दिखाई दे।