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सप्तर्षि संस्थानम् ने किया समाजसेवियों का सम्मान, संयोजक सीताकांत स्वयंभू की हुई सराहना
बाराबंकी। प्रथम विश्वयुद्ध में उत्सर्ग अमर बलिदानियों की स्मृति में सप्तर्षि संस्थानम् ट्रस्ट द्वारा हरख ब्लॉक के दियानत नगर गांव में बीते 28 दिसंबर को विराट कवि सम्मेलन एवं सम्मान समारोह का आयोजन किया गया । कार्यक्रम का प्रारंभ मुख्य अभ्यागत अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश ज्ञान प्रकाश शुक्ल, विशिष्ट अभ्यागत न्यायाधीश आशुतोष तिवारी एवं भाजपा नेत्री लज्जा चतुर्वेदी, अखिलेश चतुर्वेदी, सुरेन्द्र नाथ शुक्ल एवं कार्यक्रम संयोजक समाजसेवी सीताकान्त स्वयंभू सहित सैकड़ों लोगों द्वारा समर स्मारक के समक्ष एक हजार आठ दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया ।
जेपीएम गुरुकुल एकेडमी के बच्चों द्वारा सरस्वती वंदना, स्वागत गीत के साथ देशभक्ति प्रस्तुतियों को लोगों खूब सराहा । भाजपा नेत्री अलका मिश्रा, सर्वेश अवस्थी, डॉ गुलजार बानो, मनोज श्रीवास्तव द्वारा बच्चों प्रशस्ति पत्र और विद्यालय के प्रबंधक आलोक शर्मा और प्रधानाचार्य सविता द्विवेदी सहित सभी अतिथियों को टीम पर्यावरण प्रहरी द्वारा औषधीय पौधा भेंट कर सम्मानित किया गया। प्रथम विश्व युद्ध में उत्सर्ग बलिदानी हौसला प्रसाद सिंह राठौर जी की स्मृति में साहित्य शिरोमणि सम्मान युवा गीतकार अमन सोनी को, बलिदानी मन्नालाल शर्मा जी स्मृति में साहित्य भूषण सम्मान कवियित्री संध्या त्रिपाठी को एवं पूरे ग्राम समाज को सांस्कृतिक रुप से समृद्ध करने वाले स्वर्गीय त्रिभुवन दत्त मिश्र जी की स्मृति में राष्ट्र गौरव सम्मान न्यायाधीश आशुतोष तिवारी को प्रदान किया गया। ओजकवि रामकिशोर तिवारी ऊर्जा का संचार करते हुए पढ़ा कि चेतक पर होकर सवार राणा ने जब अगवानी की, माटी पर शौर्य पराक्रम की लिखने की शुरू कहानी की।

ओज कवि योगेश चौहान ने पढ़ा ” कुछ बगीचे भर गए हैं फूल से, कुछ बाग में न खिल सकी कोई कली। रोशनी से है नहाया राजपथ अब, अंधेरों में डूबी दिखी सूनी गली”। हास्य कवि अमित अनपढ़ ने महफिल को ठहाकों में तब्दील करते हुए पढ़ा कि ”अनपढ़ पढ़े लिखो की तरह काम कर रहे। पढ़े लिखे इस देश को बदनाम कर रहे”। ओज कवि सीताकान्त स्वयंभू ने पढ़ा कि ”छोड़कर कर अब्दुल हमीद की परम्परा को, बोलो आदर्श जहांगीर कैसे हो गए। हिंदुओं को काफिर बताया और मारा गया, गाजी जो थे पीर फकीर कैसे हो गए”। कवयित्री संध्या त्रिपाठी ने पढ़ा ”आसमां पर न मुझको फतह चाहिए, बस जमीं पर ही अपनी जगह चाहिए”। युवा गीतकार अमन सोनी ने पढ़ा ”रिश्ते यूं हीं कहीं जोड़ना मत कभी, रुख कहीं प्रेम में मोड़ना मत कभी, गर तुमको चाहे भले छोड़ दे, तुमने थामा है गर छोड़ना मत कभी”। हास्य कवि रोहित सिरफिरा ने पढ़ा कि ”हारे थे हारे हैं और हारे रह जायेंगे, जीत जीत जीत के सहारे रह जायेंगे। सोच रही बहुमत के बाद बहू लाऊंगी, इसीलिए लल्ला जी कुंवारे रह जायेंगे”। मिर्जापुर से आई श्रृंगार की कवियित्री प्रीती प्रीति ने पढ़ा ”जिस कथानक में तुम मेरे नायक नहीं, मुझको ऐसी कहानी नहीं चाहिए”। हरदोई से आए कवि प्रांजुल अस्थाना ने पढ़ा ”नीव के पत्थरों को नमन, देश बलिदानियों को नमन”। युवा कवि शिवा जी ने पढ़ा ”अमर शहीदों की याद कहानी लिखते लिखते रोया था पुलवामा वाली यादों को हमने भी खूब पिरोया था”।




