Friday, June 5, 2026
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आलोक जायसवाल बने शास्त्रीय संगीत में पीएचडी करने वाले बाराबंकी के प्रथम व्यक्ति

बाराबंकी। ज़िले के फतेहपुर तहसील के कस्बा बिशुनपुर निवासी आलोक जायसवाल ने शास्त्रीय संगीत (गायन) में पीएचडी उपाधि प्राप्त कर न केवल अपने परिवार बल्कि पूरे जनपद का मान बढ़ाया है। वह बाराबंकी ज़िले के ऐसे प्रथम व्यक्ति बन गए हैं, जिन्होंने शास्त्रीय संगीत (गायन) में डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त की है।

आलोक जायसवाल पुत्र लालजी जायसवाल वर्तमान में सेठ एम.आर.जयपुरिया स्कूल, गोमतीनगर में संगीत शिक्षक के रूप में कार्यरत हैं और देश-विदेश के अनेक विद्यार्थियों को शास्त्रीय संगीत की शिक्षा प्रदान कर रहे हैं।

उन्होंने अपनी प्रारम्भिक संगीत शिक्षा भातखंडे संगीत संस्थान से प्राप्त की। पढ़ाई के साथ-साथ संगीत को निरंतर प्राथमिकता देते हुए उन्होंने इस क्षेत्र में उच्चतम उपलब्धि हासिल की। अपनी इस सफलता का श्रेय वह अपनी दिवंगत माता गीता देवी को देते हैं, जिन्होंने बचपन में ही अपनी संतानों में संगीत का बीज बोया था।

शोध विषय और मार्गदर्शन: आलोक जायसवाल ने भातखंडे संस्कृति विश्वविद्यालय से पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उनका शोध विषय रहा “अयोध्या के वैष्णव संगीत का विश्लेषणात्मक अध्ययन (19वीं शताब्दी से अब तक के संदर्भ में)”। यह शोध उन्होंने अपनी शोध निर्देशिका डॉ. ऊषा रानी बनर्जी के निर्देशन में पूर्ण किया।

मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम में विशेष आस्था के कारण ही उन्होंने अयोध्या और वैष्णव परंपरा से जुड़े संगीत को अपने शोध का केंद्र बनाया और दृढ़ संकल्प के साथ अपना शोध कार्य सफलतापूर्वक पूर्ण किया।

प्रमुख उपलब्धियां

  • शास्त्रीय संगीत (गायन) में डॉक्टरेट – 2026

  • एम.पी.ए. (शास्त्रीय गायन) – 2015

  • निपुण (शास्त्रीय गायन) – 2016

  • यूजीसी नेट – चार बार (2017–2019)

  • आकाशवाणी एवं दूरदर्शन से ‘बी ग्रेड’ (शास्त्रीय एवं सुगम संगीत दोनों में)

गुरुओं का सान्निध्य: यह उपलब्धियाँ उन्हें अपने गुरुओंडॉ. विनीत पवैया, डॉ. कमलेश दुबे, अजय अवस्थी, प्रो. सृष्टि माथुर, देवेंद्र पाठक, डॉ. ऊषा रानी बनर्जी, स्वर्गीय तेज सिंह टाक, स्वर्गीय कृष्णानंद राय तथा माता-पिता और ईश्वर की कृपा से प्राप्त हुई हैं।

आलोक जायसवाल की यह सफलता न केवल संगीत साधकों के लिए प्रेरणास्रोत है, बल्कि यह सिद्ध करती है कि निरंतर साधना, श्रद्धा और परिश्रम से किसी भी क्षेत्र में सर्वोच्च शिखर तक पहुँचा जा सकता है।

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