हिंदी दिवस पर मातृ-पितृ सदन में बुजुर्गों को कराया भोजन, श्रद्धांजलि सभा में याद किया साहित्यिक एवं सामाजिक योगदान
बाराबंकी। हिंदी साहित्य, शिक्षा और सामाजिक सरोकारों के प्रति समर्पित साहित्य साधक, भाषाविद् एवं 14 भाषाओं के मर्मज्ञ शिक्षाविद् डॉ. भगवान वत्स की स्मृति में हिंदी दिवस पर मातृ-पितृ सदन, भुहेरा में श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। इस अवसर पर बुजुर्गों को भोजन कराया गया तथा साहित्य, शिक्षा और सामाजिक क्षेत्र में डॉ. वत्स के योगदान को याद करते हुए उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की गई। कार्यक्रम में साहित्यकारों, शिक्षाविदों, कलाकारों, समाजसेवियों तथा सदन के बुजुर्गों ने डॉ. भगवान वत्स के व्यक्तित्व एवं कृतित्व को स्मरण किया।
डॉ. वत्स की बड़ी बेटी एवं सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य डॉ. सुविद्या वत्स ने कहा कि उनके पिता का जीवन साहित्य, शिक्षा, सामाजिक सरोकारों और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति समर्पित रहा। उन्होंने अपनी लेखनी और शिक्षकीय जीवन के माध्यम से समाज में साहित्यिक चेतना विकसित करने के साथ नई पीढ़ी को मानवीय एवं सामाजिक मूल्यों से जोड़ने का कार्य किया।
उन्होंने कहा कि जवाहरलाल नेहरू पीजी कॉलेज, बाराबंकी में हिंदी विभागाध्यक्ष के रूप में डॉ. वत्स ने कई पीढ़ियों को भाषा, साहित्य और जीवन-मूल्यों की शिक्षा दी। राष्ट्रभाषा परिषद के अध्यक्ष तथा इंडियन रेडक्रॉस सोसाइटी के उपाध्यक्ष जैसे दायित्वों का निर्वहन करते हुए उन्होंने सामाजिक क्षेत्र में भी उल्लेखनीय योगदान दिया। आपातकाल के दौर में लोकतांत्रिक अधिकारों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के पक्ष में उनकी मुखर भूमिका को भी इस अवसर पर विशेष रूप से याद किया गया।
जीआईसी प्रवक्ता राम सुरेश यादव ने डॉ. वत्स के साहित्यिक योगदान और लोकतांत्रिक प्रतिबद्धता पर विचार व्यक्त किए। समाजसेवी जगराम यादव ने भी उनके व्यक्तित्व एवं सामाजिक योगदान को स्मरण करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की। कार्यक्रम में लोकगायक जमुना प्रसाद कनौजिया तथा मातृ-पितृ सदन के बुजुर्गों ने गीत प्रस्तुत किए। इस अवसर पर संचालक कमलेश कुमार सहित अंशिका यादव, उमेश यादव, रामसरन मौर्य आदि उपस्थित रहे।