मंगलवार को डीएम की अध्यक्षता में अभियोजन बैठक में सामने आया सच
बाराबंकी। बीते माह अप्रैल में दो न्यायालयों ने छह मुकदमों की छेड़छाड़ व रेप की पीड़िताओं ने अपने साथ वारदात से ही इंकार कर दिया। कई में यहीं कह दिया कि उनके साथ केवल विवाद हुआ था। रेप व छेड़छाड़ की घटना हुई हीं नहीं थी। ऐसे मामलों में अपर जिला जज पाक्सो एक्ट सुभाष चंद्र तिवारी व ज्ञान प्रकाश शुक्ला ने इसे गंभीरता से लेते हुए पाक्सो एक्ट की धारा 22(1) व बीएनएसएस की धारा 383 के तहत कथित पीड़िताओं व मुकदमा दर्ज कराने वाले नजदीकियों के खिलाफ मुकदमे दर्ज किए है।
मंगलवार को डीएम शशांक त्रिपाठी व एसपी अर्पित विजयवर्गीय की अध्यक्षता में अध्यक्षता में आयोजित बैठक में संयुक्त निदेशक अभियोजन नागेश कुमार दीक्षित ने डिटेल ब्योरा रखा। दीक्षित ने बताया कि ऐसे छह मुकदमों में एक देवा थाना के बरेठी गांव से जुड़ा है। इसमें साल 2018 में थाना देवा पर पहुंचकर मुकदमा दर्ज कराया। इसमें कहा कि वह नाबालिग है। वह अपने घर में थी कि पड़ोसी मो.आरिफ उसके घर में घुस आया और छेड़छाड़ की। चीख पुकार पर मो.आरिफ भाग गया। मुकदमा दर्ज होने के बाद पीड़िता ने कोर्ट के समक्ष अपने कलमबंद बयान में भी तहरीर में लिखी बातें दोहराई थी। फिर कोर्ट में सुनवाई के दौरान कह दिया कि उसके घर में अंदर से ताला बंद रहता है। कोई अंदर घुस नहीं सकता। उस रात केवल मो.आरिफ से विवाद हुआ था। इस पर उसकी मां ने छेड़छाड़ की बातें लिखा दी थी। ऐसे ही सुबेहा थाना के विधिवंत यादव, कुर्सी के प्रेम कुमार, दरियाबाद थाना इलाके के निवासी नीरज सहित पांच मामलों में कोर्ट के सामने कथित पीड़िताएं मुकदमा व कलमबंद बयान से मुकर गई। कोर्ट ने आरोपितों को दोषमुक्त कर दिया। इस पर कोर्ट के समक्ष एडीजीसी व विशेष लोक अभियोजकों ने पुलिस व कोर्ट का समय खराब करने का हवाला देकर कार्रवाई की मांग की। कोर्ट ने बात स्वीकार कर ली।
इन मामलों के एक्ट में छह माह की सजा व 500 रुपये जुर्माना का प्राविधान है। जिलाधिकारी ने कहा कि सभी विभागीय अधिकारी अपने विभाग से संबंधित मुकदमों की नियमित समीक्षा करें और आवश्यकतानुसार शासकीय अधिवक्ताओं से समन्वय बनाकर न्यायालय में समयबद्ध रूप से दस्तावेज एवं गवाह प्रस्तुत करें। उन्होंने कहा कि ई- प्रोक्सिकुशन में वाद रजिस्ट्रेशन की संख्या में बढ़ोत्तरी की जाय। जिलाधिकारी ने विभिन्न न्यायालयो में ग्राम सभा की भूमियों से संबंधित लम्बित वादों की समीक्षा के दौरान कहा कि ऐसे सभी प्रकरणों में जवाब दायर कर वाद निस्तारण शीघ्र करवाया जाए।



