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गोरखपुर में फैले बर्ड फ्लू के चलते जिले में जारी किया गया हाई अलर्ट
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जांच के लिए अब तक भेजे जा चुके हैं 84 पक्षियों के सैंपल
बाराबंकी। बर्ड फ्लू के मद्देनजर पशु चिकित्सा विभाग भी हरकत में आ गया है। विभाग ने पूरे जिले में हाईअलर्ट जारी कर दिया है। गोरखपुर में फैले बर्ड फ्लू के कारण छह टास्क फोर्स और 36 टीमें मुर्गी फार्मों पर जांच के लिए गठित कर दी गई है। अभी तक जिले भर में 84 पक्षियों के सैंपल लेकर जंाच के लिए बरेली अनुसंधान केन्द्र भेज दिए गए हैं। सभी मुर्गी फार्म को सेनेटाइज भी कराए जाने लगा है।
जिले में मुर्गियों के ब्रायलर फार्म 173 और लेयर फार्म 16 हैं। इसमें नौ लाख 82 हजार 506 पक्षी हैं। गोरखपुर में बर्ड फ्लू के लक्षण मिलने के बाद जिले को हाईअलर्ट पर रखा गया है, क्योंकि आज से छह वर्ष पहले 2019 में सिरौलीगौसपुर में बर्ड फ्लू से सैकड़ों की संख्या में कौवे मर गए थे। जांच में पुष्टि भी हुई थी। इसको लेकर विभाग अलर्ट है, तहसीलवार छह टास्क फोर्स का गठन कर दिया गया है, जबकि 36 मिनी कमेटियों को गठन किया गया है। जांच टीमें पक्षियों की रेंडम जांच कर रही हैं। अब तक 84 पक्षियों के सैंपल लिए गए हैं। जांच में अभी तक लक्षण नहीं मिले हैं। जांच जारी है।
बर्ड फ्लू के लक्षण : मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डा. अतुल कुमार अवस्थी ने बताया कि पक्षियों में खासकर बर्ड फ्लू तेजी से फैलता है। संक्रामक बीमारी होने के कारण पक्षियों से मनुष्य में भी यह बीमारी फैल जाती है। इसके लिए इन्फ्लुएंजा को जिम्मेदार माना जाता है। पक्षियों में इन्फ्लुएंजा का संक्रमण होने पर सांस लेने में दिक्कत होने लगती है। भूख भी कम लगती है। पक्षियों के अंडा उत्पादन में भी कमी आ जाती है। मनुष्यों में बर्ड फ्लू के लक्षण प्रकट होने के कुछ दिनों के भीतर निमोनिया और तीव्र श्वसन संकट जैसी जटिलताएं विकसित होना संभव है।
बाहर से आने वाले पक्षियों पर रखी जा रही नजरः सीवीओ ने बताया कि गठित टीम की ओर से यह भी देखा जा रहा है कि बाहर से आने वाले पक्षी कहीं फ्लू से संक्रमित तो नहीं हैं। पोल्ट्री फार्म व चिकन की दुकानें भी नगर पालिका की निगरानी में रखी गई हैं। बर्ड फ्लू बाहर से आने वाले पक्षियों की वजह से फैलता है। जांच होने तक बाहर से खरीद कर आने वाली मुर्गियों पर प्रतिबंध लगा दिया गया है।
फार्माें पर मुर्गियों में बीमारी की जांच के लिए टीमें गठित कर दी गईं हैं। अब तक 84 पक्षियों के सैंपल लेकर जांच के लिए भेजे गए हैं। मुर्गी फार्मों को सैनिटाइज किया जा रहा है। अभी तक जिले में अप्रत्याशित तौर पर किसी पक्षी की मौत नहीं हुई है।
डा. अतुल कुमार अवस्थी, मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी



