बाराबंकी। पति की लंबी उम्र और सुखद वैवाहिक जीवन की कामना के साथ सुहागिनों ने शुक्रवार को करवाचौथ का व्रत रखकर परंपरा का निर्वहन किया। शाम को चंद्रमा के दर्शन के बाद महिलाओं ने चलनी में पति का मुख देखकर व्रत का पारण किया।
पं. राजेश शास्त्री के अनुसार, करवाचौथ की पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 7 बजकर 58 मिनट से रात 8 बजकर 15 मिनट तक रहा। इसी अवधि में महिलाओं ने चलनी से चंद्रदर्शन कर अर्घ्य अर्पित किया और व्रत का समापन किया।
बाजारों में दिखी चहल-पहल
करवाचौथ को लेकर बाजारों में बीते कई दिनों से रौनक देखी गई। शुक्रवार को दिनभर पति-पत्नियों को उपहार खरीदते देखा गया। महिलाओं ने मेहंदी, साड़ियां चूड़ियां और जेवरात की खरीदारी की। साज-सज्जा के लिए बड़ी संख्या में महिलाएं ब्यूटी पार्लरों में पहुंचीं।
जेल में भी मना करवाचौथ
जिला कारागार में भी करवाचौथ का पर्व श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया गया। यहां 24 महिला कैदियों ने व्रत रखा, जिनमें से 14 के पति भी जेल में ही बंद हैं। जेल प्रशासन द्वारा व्रत रखने वाली महिलाओं को चूरा, गट्टा मिठाई और पूजन सामग्री उपलब्ध कराई गई।
जेलर राजेंद्र सिंह ने बताया कि महिता बंदियों को पर्व मनाने के लिए सभी जरूरी सुविधाएं प्रदान की गईं। शाम को उन्होंने चलनी से पति का चेहरा देखकर व्रत खोला और पूजा अर्चना की। इस दौरान महिलाओं ने एक-दूसरे को करवाचौथ की पारंपरिक लोक कथाएं भी सुनाई।
परंपरा और आस्था का संगम
करवाचौथ के इस पर्व ने यह संदेश दिया कि परिस्थितियां चाहे जैसी भी हों. आस्था और प्रेम की डोर कभी कमजोर नहीं होती। महिलाओं की आस्था, उनकी तैयारी और पूरे वातावरणा में छायी उत्सव की भावना ने करवाचौथ को एक सांस्कृतिक उत्सव में बदल दिया।