Thursday, March 19, 2026
Google search engine
HomeBARABANKI NEWSदियानत नगर में सामूहिक यज्ञोपवीत एवं विद्वत सम्मेलन संपन्न, 16 बटुकों ने...

दियानत नगर में सामूहिक यज्ञोपवीत एवं विद्वत सम्मेलन संपन्न, 16 बटुकों ने धारण किया जनेऊ

  • अयोध्या और काशी के विद्वान आचार्यों के सानिध्य में गूँजे वैदिक मंत्र

  • यज्ञोपवीत के बिना संध्यावंदन और गायत्री जप का अधिकार नहीं: आचार्य कन्हैयालाल मिश्र

बाराबंकी। भारतीय संस्कृति के आधार स्तंभ वेदों के अध्ययन का अधिकार प्रदान करने वाले ‘उपनयन संस्कार’ (यज्ञोपवीत) का भव्य आयोजन आज हरख ब्लॉक के अमर बलिदानियों की जन्मभूमि, दियानत नगर के ऐतिहासिक मेला मैदान में संपन्न हुआ। सप्तर्षि संस्थानम् ट्रस्ट के तत्वावधान में आयोजित इस द्विदिवसीय सामूहिक यज्ञोपवीत एवं विद्वत सम्मेलन में चैत्र मास और मीन संक्रांति के शुभ संयोग पर प्रयागराज, काशी और अयोध्या के प्रकांड विद्वानों द्वारा 16 बटुकों को वैदिक मंत्रोच्चार के बीच जनेऊ धारण कराया गया।

कार्यक्रम के प्रथम दिन यजमान आचार्य कन्हैयालाल मिश्र (सपत्नीक) एवं संयोजक आचार्य रविकांत मिश्र व आचार्य सीताकान्त स्वयंभू के सानिध्य में प्रायश्चित कर्म और पंचांग पूजन संपन्न हुआ। संध्या काल में अयोध्या और वृंदावन से आए कलाकारों द्वारा भजन संध्या एवं प्रवचन का आयोजन किया गया।

द्वितीय दिवस की शुरुआत बटुकों के मुंडन संस्कार से हुई। तत्पश्चात भगवान गणेश, गायत्री, सावित्री और सरस्वती आदि वेदियों पर देवताओं का आवाहन कर पूजन किया गया। आचार्य रविकांत मिश्र ने सभी बटुकों को कान में गायत्री मंत्र की दीक्षा दी।

मुख्य अतिथि महंत ओम प्रकाश दास जी महाराज (तपस्वी छावनी, अयोध्या) ने कहा, यह क्षेत्र भगवान श्रीराम की शिक्षा-दीक्षा की पावन भूमि है। यहाँ सामूहिक यज्ञोपवीत का आयोजन एक ऐतिहासिक पहल है।

मुख्य वक्ता महंत लक्ष्मण दास जी महाराज (लक्ष्मण कुंज, अयोध्या) ने संस्कार की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि संस्कार ही नर को नारायण बनाते हैं। उन्होंने प्रत्येक द्विज को प्रतिदिन कम से कम एक माला गायत्री मंत्र का जप करने का सूत्र दिया।

आचार्य कन्हैयालाल मिश्र ने संबोधित करते हुए कहा, “यज्ञोपवीत द्विजत्व का प्रतीक है। शास्त्रों के अनुसार ‘संध्याहीनोऽशुचिर्नित्यम’, अर्थात संध्यावंदन न करने वाला व्यक्ति सदैव अपवित्र माना जाता है और उसके कर्म निष्फल होते हैं। समाज के आत्म-कल्याण के लिए यह आयोजन अनिवार्य है।

संयोजक आचार्य रविकांत मिश्र ने बताया कि जिन कुलों में पीढ़ियों से यज्ञोपवीत नहीं हुआ था, उन्हें ‘व्रात्यस्तोमादि’ प्रायश्चित के माध्यम से पुनः वैदिक परंपरा से जोड़ा गया है। सह-संयोजक सीताकान्त स्वयंभू ने अतिथियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यज्ञोपवीत संस्कार भारतीय ज्ञान परंपरा का आधार है।

इस अवसर पर मुख्य रूप से भाजपा नेत्री रामकुमारी मौर्या, वरिष्ठ समाजसेवी रमेश तिवारी, देश दीपक मिश्र, देव प्रकाश मिश्र, दीपक मिश्र, रमाकांत शास्त्री, राहुल शर्मा, मनोज अवस्थी, विनोद सिंह, शोभित सिंह, उमाकांत शर्मा, अनंत शुक्ल, अनुज बाबा, सिंपू सिंह, उदयभान सिंह सहित सैकड़ों श्रद्धालु उपस्थित रहे।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -
Google search engine

Most Popular

Recent Comments