बाराबंकी। शिक्षा का अधिकार अधिनियम लागू होने से पूर्व नियुक्त शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) की अनिवार्यता किए जाने पर शिक्षकों का गुस्सा खुलकर सामने आया। शिक्षकों ने यूनाइटेड टीचर्स एसोसिएशन यूटा के बैनर तले जीजीआईसी ऑडिटोरियम से बस स्टॉप स्थित सरदार पटेल प्रतिमा तक विशाल मशाल जुलूस निकालकर शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) की अनिवार्यता पर रोष व्यक्त करते हुए इसे समाप्त करने की मांग की। इस दौरान सैकड़ों शिक्षक-शिक्षिकाओं ने एक स्वर में मशाल जुलूस के माध्यम से अपनी आवाज बुलंद की।
यूनाइटेड टीचर्स एसोसिएशन यूटा के प्रदेश अध्यक्ष राजेंद्र सिंह राठौर व जिलाध्यक्ष आशुतोष कुमार के नेतृत्व में मंगलवार को शिक्षकों ने जीजीआईसी ऑडिटोरियम से मशाल जुलूस निकाला। जिसमें प्रदेश अध्यक्ष राजेन्द्र राठौड़ ने कहा कि उत्तर प्रदेश में शिक्षा अधिकार अधिनियम 29 जुलाई 2011 को लागू किया गया था। उस समय अधिनियम में 2011 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) करने से छूट दी गई थी, लेकिन केंद्र सरकार ने इसमें 2017 में संशोधन कर दिया। इससे 2025 में न्यायालय ने सभी शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) करना अनिवार्य कर दिया। इससे देश भर के लाखों वरिष्ठ शिक्षकों के सामने नौकरी का संकट आ गया है। ऐसे शिक्षकों को न्याय दिलाने के लिए यूटा संघर्ष कर रहा है।
जिला महामंत्री सत्येंद्र भास्कर व जिला संगठन मंत्री दीपक मिश्रा ने शिक्षकों को एकजुट रहने का आह्वान करते हुए कहा कि संगठन शिक्षकों के अधिकारों के लिए लगातार संघर्ष कर रहा है। प्रदेश अध्यक्ष राजेंद्र राठौड़ के नेतृत्व में केंद्र सरकार के जनप्रतिनिधियों से संपर्क करने के साथ-साथ कानूनी स्तर पर भी के प्रयास किया जा रहा है, बहुत जल्द ही सुखद परिणाम सामने आयेगे।
इस मौके पर जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष धर्मेंद्र वर्मा, अशोक सिंह, प्राथमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष पवन वर्मा, राष्ट्रीय शैक्षिक संगठन के अध्यक्ष सुनील रावत महामंत्री संतोष वर्मा, अटेवा अध्यक्ष अमित वर्मा, यूटा आगरा जिलाध्यक्ष के के शर्मा, प्रदेश संगठन मंत्री यादवेंद्र शर्मा, सत्येंद्र भास्कर, दीपक मिश्र, देवेंद्र द्विवेदी, अलका गौतम, श्रुति बैसवार, मोहित सिंह, रजनीश शुक्ला, ब्रजेंद्र मिश्र, अभय प्रताप सिंह, महेंद्र वर्मा, दिलीप तिवारी, अलका गौतम, दिवाकर गांधी, सत्येंद्र भास्कर, हरेराम पटेल, प्रदीप श्रीवास्तव, अमरदीप सिंह, शबनम जबी, सनातन शुक्ल, प्रदीप महाजन, कुसुम रावत, शाहरुख मोबीन, पूर्णेश प्रताप सिंह, साकिब किदवई, आलोक श्रीवास्तव और श्रुति बैसवार समेत बड़ी संख्या में शिक्षक शामिल हुए।