पुलिस हिरासत में युवक की मौत की अफवाहों से आक्रोशित लोगों ने मचाया था उत्पात
दिन दहाड़े पुलिस कर्मियों पर हमला बोल फूंक दी थी पुलिस चौकी
बाराबंकी। उत्तर प्रदेश के बाराबंकी के देवा थाना क्षेत्र में आने वाले पुलिस चौकी माती को फूंकने, तोड़फोड़ करने और पुलिसकर्मियों पर जानलेवा हमले के बहुचर्चित मामले में सोमवार को अदालत ने कड़ी सजा सुनाई है। अपर सत्र न्यायाधीश प्रथम राकेश सिंह की कोर्ट ने सभी 22 आरोपियों को दोषी ठहराते हुए सात–सात वर्ष के कारावास की सजा सुनाई। साथ ही प्रत्येक दोषी पर 15 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया।
फैसले के दिन सिविल कोर्ट परिसर में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई थी। सुबह से ही लाकअप के सामने दोषियों के परिजन, खासकर महिलाओं की बड़ी संख्या में भीड़ जुटने लगी थी। जैसे ही अदालत ने दोपहर बाद सजा सुनाई, कोर्ट रूम का माहौल भावुक हो गया। दोषियों की आंखों से आंसू छलक पड़े और उनके परिजन फूट-फूटकर रोने लगे।
कड़ी सुरक्षा में सुनाया गया फैसला
अपर सत्र न्यायाधीश की कोर्ट संख्या दो में सजा सुनाए जाने के दौरान भारी पुलिस बल तैनात रहा। हर गतिविधि पर पैनी नजर रखी जा रही थी। सजा के बाद आवश्यक कानूनी औपचारिकताएं पूरी की गईं। इसके बाद पुलिसकर्मियों ने सभी अभियुक्तों को अपनी हिरासत में लेकर कड़ी सुरक्षा के बीच कैदी वाहन में बैठाया और उन्हें जेल के लिए रवाना किया।
कोर्ट परिसर में गमगीन रहा माहौल
सजा सुनते ही कई अभियुक्तों के परिवारजन खुद को संभाल नहीं सके। महिलाएं चीख-चीखकर रोती रहीं, जबकि पुरुष परिजन भी भावनाओं पर काबू नहीं रख पाए। कुछ देर के लिए कोर्ट रूम और परिसर में गमगीन माहौल छा गया। पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित करते हुए सभी दोषियों को सुरक्षित रूप से जेल भेजा। प्रशासन की ओर से पूरे घटनाक्रम के दौरान सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद रखी गई, ताकि किसी भी प्रकार की अव्यवस्था न हो।
हिरासत में मौत की अफवाह से भड़के लोगों ने मचाया था उत्पात
करीब दस साल पहले हुई एक घटना ने पूरे जिले को झकझोर कर रख दिया था। 30 अगस्त 2015 को चोरी के मामले में पकड़े गए सुभाष रघुवंशी की पुलिस हिरासत में मौत की खबर फैलते ही जिले का माहौल अचानक गर्म हो गया। परिजनों और ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि पुलिस की पिटाई से सुभाष की मौत हुई है, जबकि पुलिस का कहना था कि युवक ने लाकअप में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली।
युवक की मौत पर भड़के थे लोग
इस विरोधाभासी दावे के बाद आक्रोश फूट पड़ा और गुस्साए ग्रामीणों ने माती पुलिस चौकी को निशाना बना लिया। घटना के बाद हालात इतने बिगड़े कि बाराबंकी के देवा थाना क्षेत्र स्थित माती पुलिस चौकी में आगजनी, तोड़फोड़ और पुलिसकर्मियों से मारपीट की गई। हालात को काबू में करने के लिए प्रशासन ने तत्काल प्रभाव से माती चौकी का पूरा स्टाफ बदल दिया और कई पुलिसकर्मियों को लाइन हाजिर कर दिया था। साथ ही उपद्रव में शामिल लोगों के खिलाफ मुकदमे दर्ज किए गए।
सौ से अधिक ग्रामीणों ने बोला था चौकी पर धावा
31 अगस्त 2015 को दोपहर करीब 1 बजकर 20 मिनट पर सैकड़ों ग्रामीण लाठी, डंडे और लोहे की सरिया लेकर देवा–लखनऊ मार्ग स्थित माती पुलिस चौकी पहुंचे। कुछ लोग डिब्बों में डीजल और पेट्रोल लेकर आए थे। देखते ही देखते चौकी को चारों ओर से घेर लिया गया और उग्र भीड़ ने हमला बोल दिया। पुलिस कर्मियों की पिटाई की गई, वाहनों में आग लगा दी गई और वायरलेस सेट व सरकारी अभिलेखों को भी जला दिया गया।
दो आरोपियों को ही चुकी है मौत
इस घटनाक्रम के बाद विवेचना में 24 लोगों पर आरोपी सही पाए जाने पर पुलिस ने चार्जशीट दाखिल की थी। इस दौरान दो आरोपियों की मौत हो गई। शेष 22 के खिलाफ मामला चला।