Friday, June 5, 2026
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50 साल बाद आया फैसला: पूर्व तालुकेदार की 35 बीघा जमीन सीलिंग घोषित, कीमत 150 करोड़ से अधिक

बाराबंकी। करीब पचास वर्षों से लंबित एक मुकदमे में सोमवार को बड़ा फैसला आया है। अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) अरुण कुमार सिंह ने सुनवाई पूरी करते हुए 19 बीघा 6 बिस्वां 14 बिस्वांसी (लगभग 35 बीघा पक्का) भूमि को सीलिंग घोषित कर दिया है। साथ ही आदेश दिया गया है कि इन जमीनों को राजस्व अभिलेखों में सरकार के नाम दर्ज कर कब्जे में लिया जाए।

यह भूमि मोहम्मदपुर चौकी, कमरपुर, सराय अकबराबाद, बड़ेल बाहर सीमा और करखा गांवों में फैली हुई है, जो लखनऊ जिले की सीमा से सटी है। इसकी अनुमानित कीमत 150 करोड़ रुपये से अधिक बताई जा रही है।

तालुकेदार परिवार की जमीन पर चला था मुकदमा: यह मामला नगर के पैसार के पूर्व तालुकेदार चौधरी मोहम्मद अजीमुद्दीन अशरफ से जुड़ा है। उत्तर प्रदेश अधिकतम जोत सीमा आरोपण अधिनियम 1960 एवं संशोधित अधिनियम 1972 के लागू होने के बाद उनके नाम से तय सीमा से अधिक जमीन को सीलिंग के तहत चिन्हित किया गया था।

मुकदमे की शुरुआत 23 अगस्त 1974, 16 अक्टूबर 1974 और 26 दिसंबर 1974 को जारी नोटिसों से हुई थी। सुनवाई के बजाय अजीमुद्दीन अशरफ ने हाईकोर्ट से स्टे ऑर्डर ले लिया, जिससे मामला वर्षों तक लटका रहा। बाद में स्टे हटने पर सुनवाई दोबारा शुरू हुई। अब 50 साल बाद फैसला सुनाते हुए एडीएम ने भूमि को सरकार के पक्ष में सीलिंग घोषित कर दिया है।

कई गाटों पर रियल एस्टेट कंपनियों का कब्जा: सबसे प्रमुख लगभग 9 बीघा भूमि मोहम्मदपुर चौकी ग्राम पंचायत की है, जिसमें गाटा संख्या 119, 135, 138, 174, 179, 183, 186, 187, 188, 189, 190, 192, 193, 196, 198, 199, 200, 203, 204, 205, 207, 208, 209 और 228 शामिल हैं। बताया जा रहा है कि इनमें से कई जमीनों पर एक बड़े रियल एस्टेट समूह का कब्जा है और कुछ हिस्से बेचे भी जा चुके हैं।

गायब हुई दो भाइयों की सीलिंग फाइलें, अब मिलीं: सुनवाई के दौरान यह तथ्य सामने आया कि चौधरी अजीमुद्दीन अशरफ के दो भाई इमादउद्दीन अशरफ और जियाउद्दीन अशरफ के नाम पर भी अतिरिक्त जमीनें दर्ज थीं। उनकी सीलिंग से जुड़ी पत्रावलियां वर्षों से गायब थीं, जिन्हें अब प्रशासन ने खोज निकाला है। दोनों के नाम से भी करोड़ों की जमीन सीलिंग में छोड़े जाने की प्रक्रिया में है।

जिले में 1463 हेक्टेयर सीलिंग की जमीन दर्ज: पिछले वर्ष नवंबर में तत्कालीन जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार ने जिले में सीलिंग की जमीनों की व्यापक जांच कराई थी। रिपोर्ट के अनुसार, सदर तहसील में 339 गाटों में 132 हेक्टेयर, फतेहपुर तहसील में 412 गाटों में 287 हेक्टेयर, रामसनेहीघाट में 401 हेक्टेयर,है दरगढ़ में 111 हेक्टेयर, रामनगर में 239 हेक्टेयर, तथा सिरौली गौसपुर में 291 हेक्टेयर भूमि सीलिंग के अंतर्गत दर्ज की गई है।

कुल मिलाकर 4234 गाटों में 1463 हेक्टेयर भूमि सरकारी अभिलेखों में सीलिंग के रूप में दर्ज है, जिनमें से कई पर अभी तक कब्जा नहीं लिया जा सका है।

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