शिकायत के बाद भी जांच तक ही सीमित रही अधिकारियों की कार्रवाई
बाराबंकी। चंदवारा में अयोध्या हाईवे के किनारे बने मुर्गी पालन फार्म से लगातार दुर्गंध उठ रही है। आसपास के लोगों का दुंर्गंध के चलते जीना दुश्वार हो गया है। परेशान लोगों ने प्रशासन से लेकर शासन तक मामला उठाया, लेकिन फार्म पर कार्रवाई जांच से आगे नहीं बढ़ सकी। या यूं कहे अधिकारी मुर्गी फार्म पर कार्रवाई करने की हिम्मत नहीं जुटा रहे हैं।
अयोध्या हाइवे के किनारे चंदवारा में स्थापित दयाल फार्म साइंसेज में मुर्गी पालन से उठती दुर्गंध से सालों से आसपास के लोग परेशान है। इसके बाद भी राजस्व प्रशासन व प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड चिट्ठी पत्री का खेल खेल रहे है। बोर्ड कभी अपनी रिपोर्ट में कहता है कि इस मुर्गी पालन को बंद किया जाए और कभी कार्रवाई से हाथ खड़े कर लेता है। प्रशासन के अधिकारी खुद अपनी रिपोर्ट में कहते है कि पब्लिक न्यूसेंस के हालात है? इसके बाद भी वह इस हालात से लोगों को बचाने के लिए प्रभावी कदम नहीं उठा पा रहा है। इससे पास में संचालित स्कूल के सैकड़ों छात्र, आसपास संचालित होटल व रेस्टोंरेंट व आवासित लोग दुर्गंध का दंश झेलने को विवश है। चंदवारा के प्रधान रमेश चंद्र जायसवाल के अनुसार उनकी गांव की सीमा में अयोध्या हाइवे के किनारे पर्यावरण प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की एनओसी के बिना दयाल फार्म साइंसेंज प्राइवेट लिमिटेड को पशुपालन विभाग की ओर से करीब छह साल पहले मुर्गी फार्म संचालित करने की अनुमति दी गई। साथ ही भारी भरकम अनुदान दे दिया गया। इसके बाद से लगातार फार्म से उठती दुर्गंध आसपास के स्कूल, रेस्टोरेंट व रहने वाले लोगों के लिए मुसीबत बनी हुई है। उन्होंने इस पर दिसम्बर माह में आईजीआरएस पर शिकायत की थी। उस पर लेखपाल व राजस्व अधिकारियों ने मौके की जांच की और अपनी रिपोर्ट में कहा कि फार्म हाउस में बेहद गंदगी है। आसपास का माहौल दूषित हो रहा है। इस पर आज तक कार्रवाई नहीं की गई। इधर एक अन्य शिकायतकर्ता सुरेश चंद्र चैहान ने पर्यावरण प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से शिकायत की। क्षेत्रीय अधिकारी जेपी मौर्य की ओर से टीम भेजकर 12 दिसम्बर को जांच कराई। जांच में पाया गया कि फार्म की स्थापना के लिए जरूरी एनओसी नहीं ली गई। परिसर में पांच शेड है और इनमें 32 हजार चूजों को रखने की व्यवस्था है। परिसर में बायोकम्पोजिंग की व्यवस्था नहीं है। इसके लिए बोर्ड से अनुमति नहीं ली गई है। साथ ही कहा कि मौके पर वातावरण पर प्रतिकूल प्रभाव और पब्लिक न्यूसेंस है। बोर्ड ने दयाल फार्म को नोटिस देकर जवाब मांगा। इस पर कंपनी ने जवाब में कह दिया कि उनके यहां पर 20 हजार से कम चूजें ही रखे जा रहे है और बोर्ड को कार्रवाई का ही अधिकार नहीं है। प्रभावित लोगों ने एक अप्रैल को प्रमुख सचिव पशुपालन से मुलाकात की। इस पर प्रमुख सचिव ने निदेशक को फार्म की सब्सिडी रोकने के आदेश दिए। साथ ही कहा कि शिकायतकर्ता प्रदूषण बोर्ड और एसडीएम से राहत प्राप्त करे। फिलहाल इस बारे में एसडीएम सदर आनंद तिवारी ने कहा कि मामले की फाइल तलब की गई है।