11 व 12 दिसंबर को दो दिवसीय दिव्य दर्शन व भव्य यात्रा का होगा आयोजन
लखनऊ। राजधानी वासियों को इस वर्ष एक ऐतिहासिक आध्यात्मिक अनुभव मिलने जा रहा है। श्री साईं बाबा संस्थान ट्रस्ट, शिरडी 11 और 12 दिसंबर को साईं बाबा की 110 साल पुरानी पवित्र चरण पादुकाओं का दर्शन समारोह लखनऊ में आयोजित करने जा रहा है। पहली बार इन मूल पादुकाओं को शिरडी से लखनऊ लाया जा रहा है। 10 दिसंबर की रात ये पादुकाएं साईं मंदिर कपूरथला पहुंचेगी, जिन्हें स्वयं संस्थान के मुख्य कार्यकारी अधिकारी और 2013 बैच के आईएएस अधिकारी गोरक्ष गडिलकर लेकर आ रहे हैं।
11 दिसंबर को साईं मंदिर कपूरथला में पादुकाओं का प्रतिष्ठापन किया जाएगा। प्रातः 10 बजे से रात्रि 10 बजे तक भक्त पादुकाओं के दर्शन कर सकेंगे। मध्यांन आरती दोपहर 12 बजे होगी, जिसके बाद दोपहर 1 बजे पूज्य गुरु शुभ्रम बहल साईं कथा सुनाएंगे। शाम 4 बजे मीनू सचदेवा और साईं सेवक उमाशंकर महाराज भजन प्रस्तुति देंगे, जबकि धूप आरती सायं 6:30 बजे होगी। इसके बाद साईं भजन सम्राट सक्सेना बंधु और राधा राठौर श्रोताओं को भक्ति संगीत से बांधेंगे।
अगले दिन 12 दिसंबर की सुबह 9 बजे साईं मंदिर कपूरथला से ‘द गोल्डेन सेलिब्रेशन’ स्थल के लिए साईं चरण पादुका की भव्य यात्रा निकलेगी। होटल पहुंचने के बाद टरण पादुका प्रातः 11 बजे से रात्रि 10 बजे तक दर्शनार्थ रहेंगी। इस दौरान दोपहर 1 बजे पूज्य गुरु शुभ्रम बहल कथा का वाचन करेंगे। शाम 4 बजे विष्णु तिवारी साईं भजन प्रस्तुति देंगे, जबकि शाम 6:30 बजे धूप आरती सायं 6:30 बजे और उसके बाद सायं 7 बजे पारस जैन साईं भजन प्रस्तुत करेंगे। पूरे दिन भजन-कीर्तन के माध्यम से भक्त साईं बाबा का गुणगान करते रहेंगे।
गोरक्ष गडिलकर ने बताया कि यात्रा का उद्देश्य उन भक्तों, बुजुर्गों और दिव्यांगों तक बाबा का आशीर्वाद पहुंचाना है, जो शिरडी नहीं जा पाते। उन्होंने कहा कि बाबा की पादुका मतलब बाबा स्वयं। यह दर्शन किसी भी भक्त के लिए जीवनभर की इच्छा पूर्ण होने जैसा है। 1918 में समाधि से पूर्व बाबा जिन पादुकाओं को पहनते थे, वही मूल पादुकाएं यहां दर्शन के लिए लाई जा रही हैं। इनमें किसी भी तरह की सजावट नहीं की गई है और इन्हें बाबा के समय की ही अवस्था में संरक्षित रखा गया है। इनका संरक्षण आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया करता है। पादुकाओं को छूने की अनुमति नहीं होगी, लेकिन भक्त कांच के कवर से दर्शन कर सकेंगे।
आयोजक राजेश अरोड़ा ‘बब्बू’ ने बताया कि यह पादुकाएं 2017-18 में दूसरी बार म्यूजियम से बाहर निकाली गई थीं, जब बाबा की समाधि के 100 साल पूरे हुए थे। अप्रैल 2024 में दक्षिण भारत में इनका दौरा हुआ और अब उत्तर भारत की यात्रा 1 दिसंबर से शुरू हुई है। लखनऊ में होने वाला यह आयोजन भक्तों के लिए एक दुर्लभ और पावन अवसर लेकर आ रहा है, जिसका इंतजार लंबे समय से किया जा रहा था।