बाराबंकी। पैसार के तालुकेदार चौधरी अजीमुद्दीन अशरफ की सीलिंग में छोड़ी गई जमीनों को राजस्व न्यायालयों में मामला लंबित रहते हुए भी बेच दिया गया। सिर्फ यही नहीं, जिलेभर में सीलिंग की जमीनों की बिक्री पर प्रशासनिक सख्ती न बरते जाने से अधिकांश भूमि पर अब निजी कब्जे हो चुके हैं।
सीलिंग भूमि की बिक्री और उस पर कब्जे की शिकायत 1 वर्ष पहले 07 अक्टूबर 2024 को जगजीवन दास सतनाम सेवा ट्रस्ट, बाराबंकी के ट्रस्टी महंत बीपी दास ‘बाबा’ ने जिलाधिकारी से की थी। जिस पर नगर कोतवाली में दो व एक मुकदमा थाना सतरिख में दर्ज कराया गया था।
यह कार्रवाई पूर्व डीएम सत्येंद्र कुमार के निर्देश पर 25 अक्टूबर 2024 को सदर तहसील के तत्कालीन लेखपाल प्रमोद तिवारी ने कराई थी। मुकदमे में बताया गया था कि चौधरी अजीमुद्दीन अशरफ की सीलिंग की जमीन से संबंधित मामला एडीएम (वित्त एवं राजस्व) के न्यायालय में विचाराधीन था।
31 मार्च 2003 को एडीएम कोर्ट ने सीलिंग भूमि की गाटा संख्याएं तय की थीं, लेकिन मामला बाद में पुनः अपर आयुक्त अयोध्या मंडल के न्यायालय में तलब हो गया। इसी तरह 18 अगस्त 2011 को दोबारा सीलिंग भूमि से जुड़ी गाटा संख्याओं को लेकर सुनवाई लंबित हो गई। इसके बावजूद संबंधित जमीनों के खतौनी में प्रपत्र 5 व 6 का अनुपालन नहीं किया गया।
इसी शिथिलता का फायदा उठाते हुए गाटा संख्या 280, 284 व 301 की आंशिक जमीनें एसएएस कोलोनाइजर्स प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक खालिद मसूद (गोलागंज, लखनऊ) को बेच दी गईं। इसके अलावा नई गाटा संख्या 284, 301, 302 व 293 भी बिक्री के दायरे में आ गईं।
इस प्रकरण में वारिस सैयद अफरोज शेर, सैयद फरोग शेर, अंजुम फातिमा अशरफ, सईदा फातिमा, जुलेखा खातून, जहानआरा और खरीददार खालिद मसूद को नामजद किया गया।
खरीददार को क्लीनचिट, चार आरोपियों पर वारंट
पुलिस ने विवेचना के बाद चार्जशीट दाखिल कर दी है, जिसे सीजेएम न्यायालय ने स्वीकार कर लिया है। विवेचना में पुलिस ने खरीददारों को क्लीनचिट देते हुए अपराध को केवल धोखाधड़ी की धारा तक सीमित बताया। कोर्ट ने अंजुम फातिमा अशरफ, सईदा फातिमा अशरफ, सैयद फरोग शेर व सैयद अफरोज शेर के खिलाफ वारंट जारी किया है। अगली सुनवाई की तिथि 5 नवंबर नियत की गई है।
शालीमार कॉर्प लिमिटेड ने जारी की सफाई
लखनऊ रोड स्थित मोहम्मदपुर के शालीमार ग्रुप टाउनशिप के निवासी सीलिंग विवाद को लेकर आशंकित हैं। इस पर शालीमार कॉर्प लिमिटेड ने अपने टाउनशिप गेट पर नोटिस लगाकर सफाई दी है। कंपनी ने कहा है कि “शालीमार मन्नत टाउनशिप” विकसित करने से पहले बाराबंकी प्रशासन से एनओसी ली गई थी। परियोजना में किसी प्रकार की अनियमितता नहीं की गई है। भूमि जेडीए के माध्यम से पुराने जमींदारों — सैयद नावेद शेर, सैयद फरोग शेर, सैयद मशरूर, सैयद फरीदा शेर, गजला शेर, सनम रशीद, एएस सिद्दीकी व मोहम्मद नईम अहमद से खरीदी गई थी। कंपनी ने कहा कि यदि किसी गाटा संख्या को सीलिंग भूमि के रूप में चिह्नित किया जाता है तो खातेदार वैकल्पिक भूमि उपलब्ध कराएंगे।