स्थलीय सत्यापना पर खुला फर्जी पते का राज, पहले ही दर्ज हो चुके कई मुकदमे
बाराबंकी। फर्जी कंपनी बना कर करोड़ों की जीएसटी चोरी करने वाले गैर प्रांत के व्यापारियों की कलाई राज्य कर उपायुक्त की स्थलीय जांच में खुल रही है। अभी तक फर्जीवाड़ा कर जीएसटी चोरी करने वाले कई व्यापारियों पर कोतवाली नगर में मुकदमा दर्ज किया जा चुका है। मंगलवार को भी जीएसटी विशेष जांच दल की उपायुक्त अल्पना वर्मा ने फर्जी फर्म बनवाकर 34 करोड़ की जीएसटी चोरी करने के मामले दो और व्यापारियों पर मुकदमा दर्ज कराया है।
विभागीय पोर्टल पर उपलब्ध आंकड़ों का विश्लेषण करने के बाद नवाबगंज में पंजीकृत फर्म एआइ इंटरप्राइजेज के घोषित व्यापार स्थल माती बाजार के पते पर तलाश व पूछताछ करने पर फर्म का पता नहीं चला। यही नहीं, किराये पर व्यापार स्थल उपलब्ध कराने वाले सुनील कुमार और आजमगढ़ के फर्म मालिक गुफरान के बारे में भी कोई जानकारी नहीं मिली। यह फर्म चार फरवरी 2024 को पंजीकृत हुई थी, जिससे अब तक 40 करोड़ 16 लाख 76 हजार रुपये की सप्लाई की गई, जबकि फर्म के लिए माल मंगाने और सप्लाई करने को कोई भी ई-वे बिल तक नहीं भरा गया। इससे स्पष्ट है कि व्यापारी ने फर्जी फर्म पंजीयन कराकर बिना वास्तविक खरीद-बिक्री के इसका दुरुपयोग किया है। इस फर्म से कागजों पर हुए 40 करोड़ के कारोबार से सात करोड़ 93 लाख 27 हजार रुपये जीएसटी की चोरी की गई।
इसी तरह सफेदाबाद के पते पर चौहान इंटरप्राइजेज के विभागीय पोर्टल पर आंकड़ों का विश्लेषण करने के बाद टीम ने पंजीकृत पते पर तलाश व खोजबीन की, पर कुछ पता नहीं चला। फर्म अजीत प्रताप चौहान निवासी ठीकरहिया बेलौली सोनबरसा मऊ के नाम पंजीकृत है। बिजली का बिल भी फर्जी पाया गया। फर्म में कोई सप्लाई प्राप्त नहीं हुई। फर्म ने 22 नवंबर 2023 से 30 सितंबर 2024 तक कुल एक अरब 53 करोड़ का कारोबार दिखाकर 26 करोड़ 21 लाख रुपये का कर चोरी किया।