एसीजेएम कोर्ट ने सुनाई चार साल कारावास सजा लगाया जुर्माना
बाराबंकी। केवल 1638 रुपये के सरकारी धन के गबन के मामले में 35 साल चले मुकदमें में कोर्ट ने हैदरगढ़ तहसील के आरोपित संग्रह अमीन भानुदत्त तिवारी को चार साल के कारावास की सजा सुनाते हुए दो हजार का अर्थदंड भी लगाया है।
करीब 34 साल तक कोर्ट में चली सुनवाई के दौरान गवाह के तौर पर मुकदमा दर्ज कराने वाले तत्कालीन सिद्धौर के नायब तहसीलदार छोटेलाल, मुकदमा हैदरगढ़ कोतवाली में दर्ज करने वाले हेडमोहर्रिर नरेंद्र बहादुर सिंह व विवेचक सबइंस्पेक्टर नरेंद्र बहादुर गिरि के बयान दर्ज हुए। एसपीओ अनार सिंह के अनुसार मामला साल 1990 का है। हैदरगढ़ तहसील के नायब तहसीलदार हरिराम को जानकारी मिली कि बहुता सोनिकपुर सर्किल के संग्रह अमीन भानु दत्त तिवारी ने किसान बच्चू सिंह व जयप्रताप सिंह आदि किसानों से भू राजस्व के बकाया का धन प्राप्त किया और उनको कुल आठ रसींदे दी और पैसा तहसील कार्यालय में जमा नहीं किया। इस पर उन्होंने विवरण की जांच की, जिसमें संग्रह अमीन भानु दत्त तिवारी को दी गई 26 रसीद बुकों की जांच में पता चला कि इन रसीदों का पैसा जमा नहीं किया गया है। उनकी मूल रसीद बुक की द्वितीय प्रति भी गायब है। इस पर तत्कालीन एसडीएम ने मामले में मुकदमा दर्ज करने के आदेश दूसरे नायब तहसीलदार छोटेलाल को दिए। उन्होंने हैदरगढ़ कोतवाली में साल 1991 में अपराध संख्या 146 पर एफआईआर दर्ज कराई।
विवेचक ने चार्जशीट दाखिल की और पाया कि 1638.64 रुपये गबन किए गए है। एसपीओ ने बताया कि बाराबंकी में उनकी तैनाती हुई और यह फाइल सामने आई तो पता चला कि जांच अधिकारी हरीराम के बयान ही नहीं हुए है। इससे मुकदमा में फैसला फंसा है। इस पर उन्होंने खुद राजस्व मुख्यालय, पुलिस की मदद से जानकारी करना शुरु की तो पता चला कि वह बस्ती जिले के निवासी थे और रिटायर होने के बाद कोविड में मृत हो चुके है। परिवार में केवल भतीजा है और वह लखनऊ के गोमतीनगर में रहते है। इस पर उनसे डेथ सार्टिफिकेट लेकर सुनवाई समाप्त कराई। गुरुवार को अपर मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी रुचि तिवारी ने इस पर यह फैसला सुनाया।