Thursday, August 13, 2026
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HomeBARABANKI NEWSसरल संभाषण और आचार-विचार से ही पुनः जन-भाषा बनेगी संस्कृत- सीताकान्त 'स्वयंभू'

सरल संभाषण और आचार-विचार से ही पुनः जन-भाषा बनेगी संस्कृत- सीताकान्त ‘स्वयंभू’

सतरिख के जे०पी०एम० गुरुकुल एकेडमी में 12 दिवसीय ‘गृहे गृहे संस्कृतम्’ शिविर का हुआ शुभारंभ

बाराबंकी। उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थानम्, लखनऊ के तत्वावधान में संचालित “गृहे गृहे संस्कृतम्” योजना के अगस्तमासीय चतुर्थ चक्र के अंतर्गत बाराबंकी के जे०पी०एम० गुरुकुल एकेडमी, दियानत नगर में 12 दिवसीय संस्कृत भाषा शिक्षण शिविर का भव्य शुभारंभ हुआ।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एवं विद्यालय के प्रबंधक आलोक शर्मा ने दीप प्रज्वलित कर शिविर का उद्घाटन किया। इस दौरान प्रबंधक श्री शर्मा ने संबोधित करते हुए कहा संस्कृत केवल एक भाषा मात्र नहीं, अपितु हमारी सांस्कृतिक पहचान और ज्ञान-परंपरा की आधारशिला है। ‘गृहे गृहे संस्कृतम्’ जैसी अभिनव और पावन योजना के अंतर्गत हमारे विद्यालय परिसर में इस शिक्षण शिविर का आयोजन होना अत्यंत गौरव का विषय है।

शिविर के मुख्य प्रशिक्षक सीताकान्त मिश्र ‘स्वयंभू’ ने प्रशिक्षण की कार्ययोजना और उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए कहा:”संस्कृत भाषा को अत्यंत क्लिष्ट और केवल व्याकरण तक सीमित मान लेने की भ्रांति को दूर करना ही इस शिविर क मुख्य ध्येय है। हम क्रीड़ा, गीत, अभिनय, लघु-कथाओं और व्यावहारिक दैनिक संवाद के माध्यम से अत्यंत सहज और रोचक रीति से संस्कृत बोलना सिखाएँगे। जब तक संस्कृत हमारे जन-सामान्य के दैनिक व्यवहार की भाषा नहीं बन जाती, तब तक यह अभियान अविरल चलता रहेगा।

उद्घाटन के अवसर पर विद्यालय की प्रधानाचार्या सविता द्विवेदी, शिक्षक-शिक्षिकाएँ व छात्र-छात्राएँ उपस्थित रहे। शिविर में भाग लेने वाले सहभागियों ने पहले ही दिन से संस्कृत के व्यावहारिक वाक्यों का अभ्यास प्रारंभ किया।

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