Saturday, June 6, 2026
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प्रकृति और परम्परा से जुड़ा श्रावणी उपाकर्म: पं. कन्हैयालाल मिश्र

  • सैलानी माता मंदिर में हुआ श्रावणी उपाकर्म एवं संस्कृत दिवस का आयोजन

बाराबंकी। श्रावण पूर्णिमा के अवसर पर शुक्रवार को सप्तर्षि संस्थानम् की ओर से सैलानी माता मंदिर प्रांगण में श्रावणी उपाकर्म एवं संस्कृत दिवस बड़े उत्साह के साथ मनाया गया। कार्यक्रम की शुरुआत प्राकृतिक जल स्रोत में दशविधि स्नान एवं पंचगव्य पान से हुई, जिसके पश्चात आत्मशुद्धिकरण, हेमाद्रि संकल्प, दशविधि स्नान, पितरों के कल्याणार्थ संध्या, तर्पण, सप्तर्षि एवं यज्ञोपवीत पूजन कर हवन-यज्ञ में आहुतियां दी गईं।

यज्ञाचार्य रविकान्त मिश्र ने कहा कि “श्रावणी उपाकर्म केवल यज्ञोपवीत बदलना और वस्त्र परिवर्तन नहीं, बल्कि आचार, विचार और संस्कार का नवीनीकरण है। संस्कार ही संस्कृति का आधार हैं, और श्रावणी उपाकर्म संस्कारों का वार्षिक उत्सव है।” आयोजक पं. कन्हैयालाल मिश्र ने श्रावणी उपाकर्म, श्रावण मास की पूर्णिमा को मनाया जाने वाला प्रकृति से जुड़ा पर्व बताया। वहीं जिला कार्यवाह सुधीर तिवारी ने इस परंपरा को हर वर्ष संस्कार, संयम व सेवा के पथ पर चलने के लिए प्रेरित करने वाला बताया।

संस्कृतज्ञ सीताकान्त स्वयंभू ने कहा कि “श्रावणी पूर्णिमा के दिन संस्कृत दिवस मनाया जाता है। संस्कृत के संवर्धन से हिन्दी सहित सभी भारतीय भाषाओं को बल मिलेगा। अतः जनगणना में भाषा विकल्प में संस्कृत को चुनें, क्योंकि किसी भाषा के बोलने वाले जितने अधिक होते हैं, वह भाषा उतनी ही संरक्षित और विकसित होती है। संस्कृत संवर्धन एवं संरक्षण से संस्कृति की रक्षा होगी।

इस मौके पर शिक्षक नेता सुशील कुमार पांडेय, पशुपतिनाथ मिश्र, दीपक मिश्र, सर्वेश अवस्थी, मनोज सिंह अशोक द्विवेदी, शशिकान्त मिश्र, यश द्विवेदी, अनुज बाबा, अनंत मिश्र, धीरज मिश्र सहित सैकड़ों लोग उपस्थित रहे।

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