Friday, June 5, 2026
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चेतावनी: सहकारी कर्मचारियों का आक्रोश, मांगें न मानी गईं तो होगा सामूहिक इस्तीफे

  • कर्मचारियों ने जिलाधिकारी एवं सहायक आयुक्त, सहायक निबंधक सहकारिता को सौपां ज्ञापन

बाराबंकी। सहकारिता विभाग के कर्मचारियों एवं सचिवों की आयोजित बैठक में कर्मचारियों का आक्रोश खुलकर सामने आया। बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं हुआ तो जिले भर के सचिव व कर्मचारी सामूहिक इस्तीफा देने को मजबूर होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी।

जिला अध्यक्ष सुदामा पांडेय की अध्यक्षता में हुई बैठक में कर्मचारियों ने आठ सूत्रीय ज्ञापन तैयार किया, जिसे सोमवार को जिलाधिकारी बाराबंकी एवं सहायक आयुक्त/सहायक निबंधक सहकारिता को सौंपा जाएगा। कर्मचारियों ने सचिवों पर दर्ज मुकदमों और जिन पर कार्रवाई की तैयारी चल रही है, उन सभी को तत्काल प्रभाव से वापस लेने की मांग की। आरोप लगाया गया कि अधिकारियों द्वारा लगातार मानसिक उत्पीड़न किया जा रहा है।

बैठक में यह भी प्रमुखता से उठाया गया कि सहकारी समितियों के सचिवों को सरकार की ओर से कोई नियमित वेतन नहीं मिलता। वर्षों से बिना वेतन कार्य कर रहे सचिव खाद वितरण के दौरान मिलने वाले मामूली कमीशन से ही परिवार का खर्च चलाने को मजबूर हैं। जिलाध्यक्ष ने कहा कि जब वेतन नहीं दिया जा रहा, तब सचिवों पर लगातार कार्रवाई और मुकदमे थोपना पूरी तरह अन्यायपूर्ण है।

कर्मचारियों ने यह आरोप भी लगाया कि पीसीएफ द्वारा धान एवं गेहूं खरीद का कमीशन पिछले तीन वर्षों से समितियों को नहीं दिया गया, जिससे अधिकांश समितियां आर्थिक संकट में हैं। कमीशन न मिलने से संचालन प्रभावित हो रहा है और कर्मचारियों के सामने गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। लंबित कमीशन का तत्काल भुगतान कराने की मांग की गई।

उर्वरक वितरण व्यवस्था पर भी सवाल उठाए गए। कर्मचारियों का कहना था कि फार्मर रजिस्ट्री के आधार पर उर्वरक वितरण के निर्देश तो जारी कर दिए गए हैं, लेकिन जिन गांवों में चकबंदी प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है या जहां किसान बटाईदारी पर खेती कर रहे हैं, वहां वितरण की कोई स्पष्ट नीति नहीं है। जमीनी हकीकत की अनदेखी कर सचिवों पर दबाव बनाया जा रहा है, जिससे भविष्य में विवाद और मुकदमों की आशंका बढ़ रही है।

इसके साथ ही अतिरिक्त समितियों का प्रभार तत्काल समाप्त करने, कर्मचारियों पर अनावश्यक दबाव बंद करने, कार्य व्यवस्था को व्यावहारिक व पारदर्शी बनाने, झूठे मुकदमों पर रोक लगाने तथा सहकारी कर्मचारियों को सुरक्षा देने की मांग भी उठाई गई।

बैठक के अंत में कर्मचारियों ने एकजुटता का संकल्प दोहराते हुए कहा कि यदि समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो बड़ा आंदोलन किया जाएगा और आवश्यकता पड़ने पर जिले भर के सचिव सामूहिक इस्तीफा देकर शासन को अपनी ताकत का एहसास कराएंगे।

बैठक में दिवाकर पांडेय, त्रिदेव तिवारी, आनंद गुप्ता, श्रीकांत वर्मा, मयंक वर्मा, दीपू वर्मा, शशिकांत द्विवेदी, राजेश कुमार, विनोद कुमार, संदीप गुप्ता, अमर सिंह वर्मा, दुर्गेश पांडेय, प्रमोद तिवारी सहित अनेक कर्मचारी मौजूद रहे।

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