मछली पालन के लिए आल्हनमऊ माइनर काटे जाने से किसानों पर आया था सिंचाई का संकट
बाराबंकी। शारदा सहायक नहर की आल्हनमऊ माइनर को दबंगों द्वारा मछली पालन के लिए काटे जाने के मामले ने अब तूल पकड़ लिया है। शनिवार को सिंचाई विभाग ने कट बंद कर पानी की आपूर्ति तो शुरू कर दी। लेकिन दोषियों पर कार्रवाई न होने से किसानों में भारी नाराजगी देखी जा रही है। खेतों में पानी पहुंचने के बावजूद किसान संतुष्ट नहीं हैं। उनका साफ कहना है पानी तो आ गया, पर न्याय नहीं मिला।
पूरेडलई ब्लॉक में यह माइनर चमरौली शाखा से निकलकर आल्हनमऊ, खमौली, सरायबरई, नवीपुर, नरहिया, चिर्रा, खजुरी, नियामतपुर और इरशाद नगर जैसे दर्जनभर गांवों के किसानों की फसल सिंचाई का मुख्य स्रोत है। जिसे दबंगों ने मछली पालन के लिए माइनर को बीच में काटे जाने से इन गांवों में खरीफ की फसल का सिंचाई संकट बढ़ गया था। किसानों ने रात-दिन संघर्ष करके प्रशासन तक अपनी आवाज पहुंचाई, तब कहीं जाकर विभाग हरकत में आया और कट बंद कराया गया। क्षेत्र के किसान राम सुरेश, फूलचंद यादव, सक्षम द्विवेदी, राम संजीवन और अन्य ने आरोप लगाया कि विभाग ने महज लीपापोती की है। जिन्होंने नहर को काटा उनके खिलाफ न तो एफआईआर दर्ज हुई और न ही कोई प्रशासनिक दबाव बनाया गया। इससे साफ है कि दबंगों को विभाग की मिलीभगत से संरक्षण मिल रहा है। किसानों ने राज्य मंत्री सतीश चंद्र शर्मा से हस्तक्षेप की मांग करते हुए चेतावनी दी है कि अगर जल्द ही दोषियों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई नहीं की गई, तो वे तहसील और जिला स्तर पर बड़ा आंदोलन करेंगे। किसानों का कहना है कि अब वे चुप बैठने वाले नहीं हैं। सक्षम द्विवेदी ने कहा कि अगर किसान नहर काट दें तो जेल भेज दिए जाते हैं, लेकिन दबंग काट दें तो कोई पूछने वाला नहीं। क्या यही न्याय है? फूलचंद यादव ने कहा कि हमारे खेतों में पानी आया है, लेकिन जब तक दोषियों को सजा नहीं मिलती, चैन नहीं मिलेगा।
सिंचाई विभाग के अवर अभियंता (JE) राजीव कुमार सिंह ने बताया माइनर के कट की जानकारी मिलते ही उसे बंद कराया गया है। सीचपाल को मौके पर भेजकर रिपोर्ट तैयार कर ली गई है, जिसे उच्चाधिकारियों को भेजा गया है। निर्देश मिलते ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।